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विस्तारवाद नहीं, विकासवाद की नीति पर चलता है भारत: इंडोनेशियाई संसद में बोले पीएम मोदी

विस्तारवाद नहीं, विकासवाद की नीति पर चलता है भारत: इंडोनेशियाई संसद में बोले पीएम मोदी

विस्तारवाद नहीं, विकासवाद की नीति पर चलता है भारत: इंडोनेशियाई संसद में बोले पीएम मोदी जकार्ता, 7 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत विस्तारवाद नहीं, बल्कि विकासवाद की नीति पर चलता है और 'सबका साथ, सबका विकास' का मंत्र ही उसकी वैश्विक सोच का आधार है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत इंडोनेशिया की संसद और वहां की जनता का आभार व्यक्त करते हुए की। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों के प्रतिनिधि और 'लोकतंत्र की जननी' भारत के एक नागरिक के रूप में वह सभी भारतीयों की ओर से शुभकामनाएं लेकर आए हैं। उन्होंने कहा, "आज इंडोनेशिया के लोगों, यहां के बच्चों, युवाओं और महिलाओं ने जिस आत्मीयता से मेरा स्वागत किया, उसने इस दिन को मेरे जीवन के सबसे यादगार दिनों में शामिल कर दिया है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें आज इंडोनेशिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्राप्त करने का भी सौभाग्य मिला है। उन्होंने इसे केवल अपना सम्मान नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के प्रति इंडोनेशिया के स्नेह, दोनों देशों की साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, साझा विरासत और लगातार मजबूत हो रहे द्विपक्षीय संबंधों का सम्मान बताया। उन्होंने कहा, "मैं इंडोनेशिया की सरकार, संसद और यहां की जनता का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।" अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत हमेशा विकास की राह पर चलने में विश्वास रखता है, न कि विस्तारवाद की नीति में। उन्होंने कहा, "भारत दुनिया का वह देश है, जो विस्तारवाद नहीं, विकासवाद की नीति पर चलता है। इसलिए भारत का मंत्र है- 'सबका साथ, सबका विकास'। इसी भावना और इसी मंत्र के साथ मैं आज आपके बीच आया हूं।" भारत और इंडोनेशिया के संबंधों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों की राजधानियां भले ही हजारों किलोमीटर दूर हों, लेकिन समुद्र में दोनों देशों के बीच केवल करीब 150 किलोमीटर की दूरी है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में समुद्र सीमाओं और दूरियों का प्रतीक रहा है, लेकिन भारत और इंडोनेशिया के बीच समुद्र हमेशा एक सेतु की भूमिका निभाता रहा है और दोनों देशों के साझा भविष्य का केंद्र भी है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों की जड़ें सदियों पुरानी हैं। दोनों देशों को रामायण और महाभारत जैसी साझा सांस्कृतिक विरासत जोड़ती है। उन्होंने कहा कि नालंदा की ज्ञान परंपरा से लेकर बोरोबुदुर और प्रम्बानन जैसे ऐतिहासिक स्मारक दोनों देशों के गहरे सांस्कृतिक संबंधों के साक्षी हैं।

Raj Sharma | July 7, 2026 | Politics | Economy


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