एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस का वित्त वर्ष 26 में घाटा दोगुने से अधिक बढ़कर 22,238 करोड़ रुपए हुआ
नई दिल्ली, 28 जुलाई। टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया और उसकी बजट एयरलाइन एयर इंडिया एक्सप्रेस को वित्त वर्ष 2025-26 में संयुक्त रूप से 22,238 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा हुआ, जो पिछले वित्त वर्ष के 10,859 करोड़ रुपए के घाटे से दोगुना से भी अधिक है। इस दौरान दोनों एयरलाइंस की संयुक्त आय में भी करीब 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
एयरलाइंस की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 26 में दोनों कंपनियों की संयुक्त आय 71,870 करोड़ रुपए रही।
इस दौरान एयर इंडिया ने वित्त वर्ष 26 में 51,452 करोड़ रुए का राजस्व दर्ज किया और उसका शुद्ध घाटा 15,368 करोड़ रुपए रहा। वहीं, एयर इंडिया एक्सप्रेस का राजस्व 19,088 करोड़ रुपए और शुद्ध घाटा 6,767 करोड़ रुपए रहा।
वर्तमान में एयर इंडिया में 73.82 प्रतिशत हिस्सेदारी टाटा संस, 25.1 प्रतिशत हिस्सेदारी सिंगापुर एयरलाइंस और 1.08 प्रतिशत हिस्सेदारी कर्मचारियों की है। कर्मचारियों की यह हिस्सेदारी 2022 में एयरलाइन के निजीकरण के दौरान शुरू की गई शेयर लाभ योजना के तहत दी गई थी।
शेयरधारकों को संबोधित करते हुए एयर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा कि एयरलाइन के ट्रांसफॉर्मेशन को दीर्घकालिक प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि विश्वस्तरीय वैश्विक एयरलाइन का निर्माण कुछ तिमाहियों में संभव नहीं है।
उन्होंने अपने संदेश में लिखा, "इतिहास की हर महान एयरलाइन दशकों में बनी है, कुछ तिमाहियों में नहीं।"
चंद्रशेखरन ने कहा कि एयर इंडिया का कायाकल्प 5 से 10 वर्षों की यात्रा है। उन्होंने बताया कि जब टाटा समूह ने एयरलाइन का अधिग्रहण किया था, तब उसकी स्थिति चुनौतीपूर्ण थी। इसके अलावा विमानों के पुर्जों की आपूर्ति श्रृंखला में लंबे समय से जारी बाधाएं, पुराने सिस्टम और प्रक्रियाओं का आधुनिकीकरण, विमान बेड़े का नवीनीकरण, संगठनात्मक संस्कृति में बदलाव और बड़ी संख्या में कुशल तकनीकी व विमानन पेशेवरों को तैयार करना भी इस परिवर्तन का हिस्सा है।
उनके बयान से संकेत मिलता है कि एयर इंडिया के टर्नअराउंड में शुरुआती अनुमान से अधिक समय लग सकता है, क्योंकि टाटा समूह 2022 में सरकार से एयरलाइन का अधिग्रहण करने के बाद उसके पुनरुद्धार के लिए कई अरब डॉलर का निवेश जारी रखे हुए है।