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अमेरिकी सीनेटर ने अपने विश्वविद्यालयों में चीन के फंड की जांच की मांग की

अमेरिकी सीनेटर ने अपने विश्वविद्यालयों में चीन के फंड की जांच की मांग की

अमेरिकी सीनेटर ने अपने विश्वविद्यालयों में चीन के फंड की जांच की मांग की


वॉशिंगटन, 28 जुलाई। एक रिपब्लिकन सीनेटर ने अमेरिकी विश्वविद्यालयों में चीनी निवेश की ज्यादा बारीकी से जांच करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जिन संस्थाओं पर प्रतिबंध लगा है, उनके साथ गुप्त वित्तीय संबंध अमेरिका के इनोवेशन और राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचा सकते हैं।


अर्कांसस के सीनेटर टॉम कॉटन ने सोमवार को शिक्षा सचिव लिंडा मैकमोहन को एक पत्र लिखकर यह अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि चीनी संस्थाओं से जुड़े लाखों डॉलर के लेन-देन की शायद इसलिए रिपोर्ट नहीं की गई होगी क्योंकि वे फेडरल डिस्क्लोजर की सीमा से कम थे।


कॉटन ने लिखा, "मैं अमेरिकी विश्वविद्यालयों में प्रतिबंधित चीनी संस्थाओं के निवेश को लेकर चिंता जाहिर करने के लिए यह पत्र लिख रहा हूं। ये निवेश चीन को अपने हितों को आगे बढ़ाने का मौका देते हैं, जबकि अमेरिकी इनोवेशन और हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करते हैं।"


सीनेटर ने 2 जनवरी को अमेरिकी शिक्षा विभाग द्वारा शुरू किए गए एक ऑनलाइन पोर्टल के डेटा का हवाला दिया। यह पोर्टल अमेरिकी विश्वविद्यालयों को मिलने वाले विदेशी चंदे के बारे में कुल और संस्थान-स्तर की जानकारी देता है।


कॉटन ने कहा कि 31 जनवरी तक फेडरल फंड से चलने वाली यूनिवर्सिटीज ने चीन से 6.8 अरब डॉलर से अधिक की रकम ली थी। इसमें प्रतिबंध वाली संस्थाओं से मिली 300 मिलियन डॉलर से अधिक की रकम भी शामिल थी। उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का खास तौर पर जिक्र करते हुए कहा कि उसे चीनी संस्थाओं से 630 मिलियन डॉलर से ज्यादा मिले हैं।


कॉटन ने अपने पत्र में लिखा, "इसमें विदेशी टैलेंट प्रोग्राम में शामिल संगठनों से मिली लगभग 418,000 डॉलर की रकम और अनधिकृत सैन्य तरक्की में मदद करने वाली संस्थाओं से मिली लगभग 420,000 डॉलर की रकम शामिल है।"


कॉटन ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग की कोशिशों की तारीफ की। उन्होंने उन यूनिवर्सिटीज के खिलाफ की गई कार्रवाई का जिक्र किया जो फाइनेंशियल रिपोर्टिंग की जरूरतों को पूरा करने में नाकाम रहीं। लेकिन सेनेटर ने कहा कि मौजूदा नियमों के तहत छोटे लेन-देन सार्वजनिक जानकारी से बच सकते हैं।


उन्होंने लिखा, "फेडरल फंड से चलने वाली यूनिवर्सिटीज के लिए एक साल में किसी एक विदेशी स्रोत से 250,000 डॉलर से कम के लेन-देन की जानकारी देना जरूरी नहीं है। मुझे चिंता है कि प्रतिबंध वाली चीनी संस्थाओं के साथ लाखों डॉलर के अतिरिक्त लेन-देन की शायद रिपोर्ट नहीं दी गई होगी। इसलिए, मैं अमेरिकी विश्वविद्यालयों और कम्युनिस्ट चीन के बीच वित्तीय संबंधों की और ज़्यादा जांच-पड़ताल करने का सुझाव देता हूं।”


इस पत्र में दूसरे विश्वविद्यालयों का जिक्र नहीं किया गया और न ही उन कदमों के बारे में विस्तार से बताया गया, जो कॉटन चाहते हैं कि विभाग उठाए। इसमें हार्वर्ड या किसी अन्य संस्थान पर अमेरिकी कानून तोड़ने का आरोप भी नहीं लगाया गया।


कॉटन की यह मांग विश्वविद्यालयों को मिलने वाली विदेशी फंडिंग, खासकर चीन से जुड़े पैसे की वाशिंगटन में बढ़ती जांच-पड़ताल का हिस्सा है। अमेरिकी कानून बनाने वाले अब एकेडमिक रिसर्च और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी तक पहुंच को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के तौर पर देखने लगे हैं।


संघीय वित्तीय सहायता पाने वाले अमेरिकी विश्वविद्यालयों को लंबे समय से कुछ विदेशी उपहारों और अनुबंधों का खुलासा करने की जरूरत रही है। इन नियमों का मकसद सरकार और जनता को उच्च शिक्षा संस्थानों को मिलने वाली विदेशी फंडिंग के बारे में अधिक जानकारी देना है।

Amanat Arora | July 28, 2026 | International | Economy


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