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छात्रों में नशे के शुरुआती संकेत पहचानेंगे शिक्षक, पंजाब में 21,850 शिक्षकों को प्रशिक्षण

छात्रों में नशे के शुरुआती संकेत पहचानेंगे शिक्षक, पंजाब में 21,850 शिक्षकों को प्रशिक्षण

छात्रों में नशे के शुरुआती संकेत पहचानेंगे शिक्षक, पंजाब में 21,850 शिक्षकों को प्रशिक्षण


चंडीगढ़: पंजाब में बच्चों और किशोरों को नशे की चपेट में आने से पहले ही पहचानने और समय पर मदद पहुंचाने की दिशा में स्कूल शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। राज्य सरकार के ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान के तहत शुरू किए गए इस कार्यक्रम में शिक्षकों को छात्रों के व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य में होने वाले ऐसे बदलावों को समझने की जानकारी दी जा रही है, जो नशीले पदार्थों के इस्तेमाल या मानसिक परेशानी के शुरुआती संकेत हो सकते हैं



इस पहल का लक्ष्य 21,850 सरकारी स्कूल शिक्षकों को प्रशिक्षित करना है। कार्यक्रम की शुरुआत 3 अगस्त 2026 को फाजिल्का और तरनतारन से हुई थी। इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से 12 जिलों तक विस्तार दिया गया। इस सूची में फाजिल्का, तरनतारन, फिरोजपुर, गुरदासपुर, पठानकोट, मुक्तसर, फरीदकोट, मोहाली, रोपड़, कपूरथला, लुधियाना और पटियाला शामिल हैं 



शिक्षक केवल पढ़ाएंगे नहीं, बच्चों के व्यवहार पर भी रखेंगे नजर

प्रशिक्षण का मकसद शिक्षकों को बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों को गंभीरता से समझने में सक्षम बनाना है। कई बार छात्र का अचानक कक्षा से दूरी बनाना, पढ़ाई में रुचि कम होना, व्यवहार बदलना या लगातार अनुपस्थित रहना केवल अनुशासन की समस्या मान लिया जाता है। प्रशिक्षण में शिक्षकों को ऐसे संकेतों को व्यापक संदर्भ में देखने और जरूरत पड़ने पर छात्र से संवेदनशील तरीके से बातचीत करने पर जोर दिया जा रहा है। 



कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य, किशोरावस्था से जुड़ी समस्याओं, परामर्श और छात्रों के मार्गदर्शन से संबंधित पहलुओं को भी शामिल किया गया है। जरूरत पड़ने पर छात्रों को उचित परामर्श या विशेषज्ञ सहायता तक पहुंचाने की भूमिका पर भी जोर दिया जा रहा है।



सीमावर्ती जिलों पर शुरुआती फोकस

पंजाब में नशे की समस्या को देखते हुए प्रशिक्षण की शुरुआती गतिविधियों में सीमावर्ती जिलों को विशेष महत्व दिया गया। इससे पहले जनवरी 2026 में भी राज्य के नौ जिलों के वरिष्ठ माध्यमिक और हाई स्कूलों के प्रिंसिपलों तथा हेडमास्टरों के लिए प्रशिक्षण आयोजित किया गया था। अमृतसर में चलाए गए एक पायलट कार्यक्रम में 2,800 से अधिक शिक्षक शामिल हुए थे।



मई में अमृतसर में एक अलग प्रशिक्षण चरण के दौरान करीब 3,238 शिक्षकों को व्यवहार विज्ञान, परामर्श और विद्यार्थियों के मार्गदर्शन से जुड़ी ट्रेनिंग देने की जानकारी सामने आई थी।



स्कूलों के आसपास भी नशे के खिलाफ सख्ती

यह पहल केवल शिक्षकों की ट्रेनिंग तक सीमित नहीं है। पंजाब में सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों के आसपास 500 मीटर के दायरे को ‘ड्रग-फ्री जोन’ के रूप में चिन्हित करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। स्कूलों को इस संबंध में सूचना बोर्ड लगाने और निर्धारित पोर्टल पर पंजीकरण करने के निर्देश दिए गए हैं।




इसके साथ ही पंजाब शिक्षा विभाग ने नशे के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम को विद्यार्थियों तक भी पहुंचाने के लिए कक्षा 9वीं से 12वीं के छात्रों के लिए विशेष पाठ्यक्रम शुरू किया है। सितंबर में सामने आई जानकारी के मुताबिक यह कार्यक्रम राज्य के 3,600 वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में 7.5 लाख से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंचाने की योजना है। इसमें पारंपरिक भाषणों के बजाय वास्तविक घटनाओं पर आधारित वीडियो, गतिविधियों और कक्षा में चर्चा को शामिल किया गया है।




मकसद सिर्फ पहचान नहीं, समय पर मदद पहुंचाना

इस पूरी पहल का मुख्य उद्देश्य किसी छात्र को केवल नशे के शक के आधार पर चिन्हित करना नहीं, बल्कि उसके व्यवहार में बदलाव के पीछे की वजह समझना और जरूरत पड़ने पर समय रहते सहायता उपलब्ध कराना है। प्रशिक्षण में शिक्षकों को छात्रों के साथ बिना डर या भेदभाव के बातचीत करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें परामर्श सेवाओं से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।


Raj Sharma | September 22, 2026 | Punjab | Google News


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