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पीएम मोदी ने यूएई के राष्‍ट्रपत‍ि, क्राउन प्रिंस और क्‍वीन मदर को भेंट किए भारत के मूल्यवान उपहार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को पांच देशों की यात्रा के बाद भारत लौटे


नई दिल्ली,  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को पांच देशों की यात्रा के बाद भारत लौटे। इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी वहां के नेताओं के ल‍िए भारत के खास और मूल्‍यवान तोहफे भी साथ ले गए। यूएई पहुंचकर प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ओर से वहां के राष्‍ट्रपत‍ि, क्राउन प्रिंस और क्‍वीन मदर को उपहार भेंट किए। 


 


पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति को 'रोगन पेंटिंग' (ट्री ऑफ लाइफ) भेंट की।


'रोगन पेंटिंग' : गुजरात के कच्छ क्षेत्र की एक बहुत ही दुर्लभ और खूबसूरत कपड़ा कला है, जो अपनी बारीक कारीगरी और चमकदार रंगों के लिए जानी जाती है। इसमें 'ट्री ऑफ लाइफ' (जीवन वृक्ष) का डिजाइन बहुत पुराना और प्रतीकात्मक माना जाता है। यह जीवन, जुड़े होने, ताकत, नएपन और निरंतरता का प्रतीक है। इसकी जड़ें धरती में होती हैं और शाखाएं आसमान की ओर जाती हैं, जो परंपरा और तरक्की के बीच संतुलन को दिखाती हैं, जो यूएई की सोच से भी मेल खाता है। इसमें इस्तेमाल होने वाले रंग कपड़े पर उभरे हुए और चमकदार दिखते हैं। यह कला धीमी लेकिन बहुत ही बारीक और टिकाऊ कारीगरी का उदाहरण है।


साथ ही, पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति को भारत का खास 'केसर आम' और 'मेघालय अनानास' भी भेंट क‍िया।


'केसर आम' : गुजरात का एक खास और जीआई टैग वाला आम है, जिसे 'आमों की रानी' भी कहा जाता है। इसकी शुरुआत जूनागढ़ से हुई मानी जाती है। इसका गूदा केसर जैसा सुनहरा-नारंगी, बिना रेशे वाला और बहुत खुशबूदार होता है। गुजरात में इसे खास तौर पर 'आमरस' के रूप में बड़े उत्सव और मेहमाननवाजी के दौरान खाया जाता है, जो वहां की समृद्ध परंपरा और गर्मजोशी को दिखाता है।


मेघालय अनानास : यह जीआई टैग वाले अनानास दुनिया के सबसे अच्छे फलों में गिने जाते हैं। ये फल मेघालय की साफ-सुथरी और पहाड़ी जमीन में उगते हैं। इनका स्वाद बहुत मीठा और खुशबूदार होता है। इनमें खट्टापन बहुत कम होता है। ये सेहत के लिए भी अच्छे माने जाते हैं क्योंकि इनमें ब्रॉमेलैन नाम का एंजाइम होता है, जो पाचन में मदद करता है और सूजन कम करता है। इनमें विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट भी भरपूर होते हैं।


साथ ही, पीएम मोदी यूएई के क्राउन प्रिंस के लिए 'कोफ्तगिरी खंजर' और 'मिथिला मखाना' लेकर गए।


कोफ्तगिरी खंजर: यह एक पारंपरिक औपचारिक खंजर है, जिस पर कोफ्तगिरी कला का सुंदर काम किया गया है। यह राजस्थान के उदयपुर में सिकलीगर और पारंपरिक धातु कारीगरों द्वारा की जाने वाली एक दुर्लभ हस्तकला है। इसमें लोहे पर बहुत बारीक सोने और चांदी के तार जड़े जाते हैं, जिससे फूलों और ज्यामितीय आकृतियों के डिजाइन बनते हैं। पहले यह राजपूत राजाओं के संरक्षण में था और हथियारों को एक कला और प्रतिष्ठा का प्रतीक बना देता था। आज भी कुछ ही कारीगर इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।


जैसे यूएई में 'खंजर' की परंपरा है, वैसे ही यह भारतीय खंजर भी साहस, सम्मान और शाही विरासत का प्रतीक है। यह भारत और यूएई के बीच दोस्ती और सांस्कृतिक सम्मान को दिखाने वाला एक खास प्रतीक है।


मिथिला मखाना: मिथिला मखाना बिहार के मिथिला क्षेत्र का एक खास उत्पाद है। इसे भी जीआई टैग मिला हुआ है। यह तालाबों और जलाशयों में उगाया जाता है। ये हल्के, कुरकुरे और बहुत पौष्टिक होते हैं। इनमें प्रोटीन, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसे खाने के रूप में, स्नैक्स के रूप में और धार्मिक परंपराओं में भी इस्तेमाल किया जाता है।


इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई की क्वीन मदर को भी उपहार भेंट क‍िए, जिनमें 'करीमनगर फिलिग्री संदूक', 'महेश्वरी सिल्क कपड़ा' और 'चक हाओ चावल' शाम‍िल थे।


करीमनगर फिलिग्री संदूक: यह चांदी से बना एक बहुत ही बारीक और सुंदर संदूक है, जो तेलंगाना के करीमनगर की मशहूर नक्काशी धातु कला का उदाहरण है। इसमें बहुत मेहनत से चांदी की शीट पर हथौड़े से उभरे हुए सुंदर डिजाइन बनाए जाते हैं। इस बॉक्स में एक शाही जुलूस का दृश्य दिखाया गया है, जिसमें हाथी और हौदा (राजसी सवारी) शामिल हैं। यह शान, सम्मान और उत्सव का प्रतीक है। यह सिर्फ एक कला का नमूना नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक विरासत भी है।


महेश्वरी सिल्क कपड़ा: महेश्वरी सिल्क भारत की एक बहुत ही सुंदर और प्रसिद्ध हैंडलूम परंपरा है, जो मध्य प्रदेश के महेश्वर शहर में शुरू हुई थी। यह कपड़ा हल्का, मुलायम और हल्की चमक वाला होता है। इसे सिल्क और कॉटन को मिलाकर बनाया जाता है, जिससे यह आरामदायक भी होता है और देखने में भी बहुत सुंदर लगता है।


इस परंपरा को 18वीं सदी में रानी अहिल्याबाई होलकर ने बढ़ावा दिया था, जिन्होंने महेश्वर को कला और संस्कृति का बड़ा केंद्र बनाया। इसकी खास बात इसका 'रिवर्सिबल बॉर्डर' है, यानी इसे दोनों तरफ से पहना जा सकता है। यह कपड़ा सिर्फ एक वस्त्र नहीं बल्कि महिला नेतृत्व और परंपरागत कारीगरी का भी प्रतीक है।


चक हाओ चावल: चक हाओ चावल जिसे मणिपुर के 'काले चावल' के नाम से जाना जाता है, पूर्वोत्तर भारत की उपजाऊ घाटियों से आने वाली एक कीमती और खुशबूदार चावल की किस्म है। पारंपरिक रूप से मणिपुर के 'शाही चावल' के तौर पर माने जाने वाले इस चावल को, एक समय में केवल राजघरानों और खास समारोहों के लिए ही सुरक्षित रखा जाता था। अपने अनोखे स्वाद और गहरे बैंगनी रंग के अलावा, चक हाओ चावल को इसके पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण भी बहुत महत्व दिया जाता है। इसमें डाइटरी फाइबर, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा काफी अधिक होती है। साथ ही, यह अपनी सूजन-रोधी और दिल के लिए फायदेमंद खूबियों के लिए भी मशहूर है। इसके अलावा, इसमें मौजूद धीरे-धीरे पचने वाले कार्बोहाइड्रेट शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करते हैं।


Raj Sharma | May 21, 2026 | World |


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