Search

'आत्मनिर्भर भारत' का असली प्रमाण है विक्रम-1 की सफलता: गौतम अदाणी

'आत्मनिर्भर भारत' का असली प्रमाण है विक्रम-1 की सफलता: गौतम अदाणी

'आत्मनिर्भर भारत' का असली प्रमाण है विक्रम-1 की सफलता: गौतम अदाणी नई दिल्ली, 18 जुलाई। अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने शनिवार को स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 की सफल ऑर्बिटल लॉन्चिंग पर बधाई देते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक मिशन भारत के निजी स्पेस इंडस्ट्री के लिए एक नए युग की शुरुआत है और 'आत्मनिर्भर भारत' की भावना का सच्चा उदाहरण भी है।


सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए अपने पोस्ट में गौतम अदाणी ने कहा कि विक्रम-1 की पहली ऑर्बिटल फ्लाइट का सफल होना और मिशन के सभी उद्देश्यों को हासिल करना भारत के तेजी से उभरते निजी स्पेस इकोसिस्टम के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।


उन्होंने कहा, "पवन चंदाना, भारत डाका, स्काईरूट एयरोस्पेस की शानदार टीम और इस मिशन को संभव बनाने वाले इसरो तथा आईएन-स्पेस को मेरी ओर से हार्दिक बधाई।"


गौतम अदाणी ने कहा कि विक्रम-1 ने अपनी पहली ऑर्बिटल फ्लाइट में मिशन के सभी उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा कर भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए एक नए दौर की शुरुआत कर दी है।


उन्होंने कहा, "इतिहास रच दिया गया है। विक्रम-1 ने अपनी पहली ऑर्बिटल फ्लाइट में मिशन के सभी उद्देश्यों को शानदार तरीके से पूरा किया है। यही 'आत्मनिर्भर भारत' का असली प्रमाण है।"


मिशन को भारत की आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताते हुए उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश की बढ़ती तकनीकी क्षमता और नवाचार की ताकत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करती है।


उन्होंने कहा, "इस टीम की औसत उम्र सिर्फ 28 वर्ष है। यह पूरी दुनिया के लिए इस बात का प्रमाण है कि युवा भारत क्या हासिल कर सकता है। जय हिंद!"


इससे पहले शनिवार को हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस ने 'मिशन आगमन' के तहत विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण किया। इसके साथ ही भारत, अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा ऐसा देश बन गया, जहां किसी निजी कंपनी ने सफलतापूर्वक रॉकेट को ऑर्बिट में पहुंचाने की क्षमता प्रदर्शित की है।


भारत के स्पेस प्रोग्राम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर विकसित चार चरणों वाला विक्रम-1 लॉन्च व्हीकल छोटे सैटेलाइट्स के लिए तेज और मांग के अनुसार लॉन्च सर्विस उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।


यह मिशन वैश्विक कमर्शियल लॉन्च मार्केट में भारत की स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में भी अहम कदम माना जा रहा है।


करीब सात मंजिला ऊंचा यह रॉकेट पृथ्वी की निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट - एलईओ) में लगभग 450 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचने के लिए भेजा गया है।


इस सफल लॉन्चिंग के साथ भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है, जहां निजी कंपनियों ने ऑर्बिटल लॉन्च की क्षमता का सफल प्रदर्शन किया है।

Amanat Arora | July 18, 2026 | Business | Economy


केंद्र ने राज्यों को जारी किए 1.09 लाख करोड़ रुपए, पूंजीगत खर्च और विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार

केंद्र ने राज्यों को जारी किए 1.09 लाख करोड़ रुपए, पूंजीगत खर्च और विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार ...

कैबिनेट ने 'समुद्र मंथन' योजना को दी मंजूरी, 84,084 करोड़ रुपए से बढ़ेगी भारत की ऑफशोर ऊर्जा क्षमता

कैबिनेट ने 'समुद्र मंथन' योजना को दी मंजूरी, 84,084 करोड़ रुपए से बढ़ेगी भारत की ऑफशोर ऊर्जा क्षमता ...

कैबिनेट ने 5,070 करोड़ रुपए की 'प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना' को दी मंजूरी, तैरते सोलर प्रोजेक्ट्स को मिलेगा बढ़ावा

कैबिनेट ने 5,070 करोड़ रुपए की 'प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना' को दी मंजूरी, तैरते सोलर प्रोजेक्ट्स को मिलेगा बढ़ावा ...

भारतीय शेयर बाजार मजबूत वैश्विक संकेतों से हरे निशान में खुला, डिफेंस और मैन्युफैक्चरिंग में खरीदारी

भारतीय शेयर बाजार मजबूत वैश्विक संकेतों से हरे निशान में खुला, डिफेंस और मैन्युफैक्चरिंग में खरीदारी ...

'विकसित भारत 2047' भारत के लक्ष्य की ओर बड़ा कदम, 2030 तक 500 अरब डॉलर का इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उत्पादन का लक्ष्य

'विकसित भारत 2047' भारत के लक्ष्य की ओर बड़ा कदम, 2030 तक 500 अरब डॉलर का इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उत्पादन का लक्ष्य ...

देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन ग्वालियर में बनेगा, केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार एमओयू पर करेंगे हस्ताक्षर

देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन ग्वालियर में बनेगा, केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार एमओयू पर करेंगे हस्ताक्षर ...