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भारत का भुगतान संतुलन वित्त वर्ष 2026-27 में अधिशेष में लौटने की उम्मीद: रिपोर्ट

भारत का भुगतान संतुलन वित्त वर्ष 2026-27 में अधिशेष में लौटने की उम्मीद: रिपोर्ट

भारत का भुगतान संतुलन वित्त वर्ष 2026-27 में अधिशेष में लौटने की उम्मीद: रिपोर्ट नई दिल्ली, 17 जुलाई। लगातार दो वर्षों के घाटे के बाद भारत का भुगतान संतुलन वित्त वर्ष 2026-27 में अधिशेष में लौट सकता है। इसका मुख्य कारण शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और अन्य पूंजी प्रवाह में मजबूती रहने की संभावना है। यह जानकारी शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।


केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 में शुद्ध एफडीआई बढ़कर 15 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2025-26 में 6.9 अरब डॉलर था। यह वृद्धि सकल एफडीआई प्रवाह में मजबूती के कारण संभव होगी।


रिपोर्ट के अनुसार, एफसीएनआर (बी) जमा, एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ईसीबी) और ओवरसीज फॉरेन करेंसी बॉरोइंग के लिए रियायती स्वैप विंडो के माध्यम से वित्त वर्ष 2026-27 में सामूहिक रूप से 45 से 60 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह हो सकता है।


रिपोर्ट में कहा गया कि पूंजी खाते का अधिशेष वित्त वर्ष 2025-26 के महज 2 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 में लगभग 73 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।


रेटिंग एजेंसी ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए चालू खाता घाटे के अपने अनुमान को भी घटाकर जीडीपी के 0.8 से 1.2 प्रतिशत कर दिया है, जबकि पहले यह अनुमान 2.1 प्रतिशत था।


सीएडी के अनुमान में यह कमी मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, सेवा निर्यात और रेमिटेंस में मजबूती तथा वस्तु निर्यात में सुधार के कारण की गई है।


रिपोर्ट में कहा गया, "हमारा संशोधित सीएडी अनुमान इस धारणा पर आधारित है कि वित्त वर्ष 2026-27 में कच्चे तेल की औसत कीमत 80-85 डॉलर प्रति बैरल रहेगी। यदि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें इससे भी कम रहती हैं, तो सीएडी जीडीपी के 1 प्रतिशत से भी नीचे आ सकता है।"


सरकार ने विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए कई नीतिगत कदम उठाए हैं। इनमें विदेशी मुद्रा बॉन्ड के दायरे का विस्तार, सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले एफआईआई/एफपीआई के लिए कर छूट तथा एनआरआई और ओसीआई के लिए निवेश सीमा बढ़ाना शामिल है।


रिपोर्ट के अनुसार, डेट मार्केट से जुड़े कुछ उपाय भारत को ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट इंडेक्स में शामिल किए जाने की राह में मौजूद प्रमुख बाधाओं को भी दूर करते हैं। इन कदमों से विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) को भी समर्थन मिलने की उम्मीद है।


वस्तु निर्यात ने वित्त वर्ष 2026-27 की मजबूत शुरुआत की है। पहली तिमाही में इसमें 15.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें पेट्रोलियम निर्यात 35.1 प्रतिशत और गैर-पेट्रोलियम निर्यात 12.5 प्रतिशत बढ़ा।


एजेंसी ने कहा, "हमें उम्मीद है कि वस्तु निर्यात की यह सकारात्मक रफ्तार आगे भी जारी रहेगी। हालांकि, भारतीय निर्यात पर अमेरिका द्वारा 12.5 प्रतिशत तक का अधिक शुल्क (टैरिफ) लगाए जाने की संभावना एक ऐसा जोखिम है, जिस पर नजर बनाए रखने की जरूरत होगी।"

Amanat Arora | July 17, 2026 | Finance | Economy


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