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न्यूयॉर्क से रवाना हुई आईएनएस सुदर्शिनी, स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के सामने लहराया तिरंगा

न्यूयॉर्क से रवाना हुई आईएनएस सुदर्शिनी, स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के सामने लहराया तिरंगा

न्यूयॉर्क से रवाना हुई आईएनएस सुदर्शिनी, स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के सामने लहराया तिरंगा नई दिल्ली, 9 जुलाई। भारतीय नौसेना की आईएनएस सुदर्शिनी ने अमेरिका में न्यूयॉर्क से आगे का सफर शुरू कर दिया है। न्यूयॉर्क में ठहरने के दौरान नौसेना के पोत ने न केवल भारत की समृद्ध समुद्री विरासत का प्रदर्शन किया, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक, सांस्कृतिक और जन-जन के संबंधों को भी नई मजबूती प्रदान की।

सुदर्शिनी स्वदेशी रूप से निर्मित तीन मस्तूल वाला बार्क पोत है। यह भारतीय नौसेना के 10 महीने लंबे अंतर महासागरीय अभियान 'लोकायन 2026' पर है। इस यात्रा के एक हिस्से के रूप में सुदर्शिनी ने अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित इंटरनेशनल नेवल रिव्यू 250 और सेल फोर्थ 250 समारोहों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। यह आयोजन दुनिया भर की नौसेनाओं और पारंपरिक नौकायन पोतों की भागीदारी के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

अब भारतीय नौसेना के नौकायन प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी ने 'लोकायन 2026' अभियान के तहत अमेरिका के न्यूयॉर्क बंदरगाह पर अपना सफल प्रवास पूरा कर लिया है। 8 जुलाई को न्यूयॉर्क से प्रस्थान के साथ ही इस ऐतिहासिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण अध्याय संपन्न हुआ। न्यूयॉर्क प्रवास का सबसे यादगार क्षण वह रहा जब आईएनएस सुदर्शिनी ने भव्य परेड ऑफ सेल में हिस्सा लिया।

इस दौरान पोत ने प्रतिष्ठित स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के सामने से गुजरते हुए हडसन नदी में नौकायन किया। तिरंगे से सुसज्जित आईएनएस सुदर्शिनी अंतरराष्ट्रीय नौकायन पोतों और युद्धपोतों के विशाल बेड़े के साथ आगे बढ़ी। इसने भारतीय समुद्री परंपरा और नौसैनिक गौरव का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। समारोह में मौजूद हजारों दर्शकों ने इस दृश्य का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।

ब्रुकलिन में प्रवास के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी ने भारत के एक राजदूत की भूमिका निभाई। जहाज पर 1,000 से अधिक लोगों ने भ्रमण किया, जिनमें भारतीय मूल के नागरिक, स्थानीय अमेरिकी निवासी, समुद्री इतिहास के शोधकर्ता और नौकायन प्रेमी शामिल थे। आगंतुकों को भारतीय नौसेना की नौकायन प्रशिक्षण परंपराओं, समुद्री इतिहास और भारत की प्राचीन समुद्री विरासत के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस दौरान जहाज पर कई विशिष्ट अतिथियों का भी आगमन हुआ।

न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्यदूत बिनय श्रीकांत प्रधान तथा संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि पर्वथनेनी हरीश ने जहाज का दौरा किया। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने चालक दल के सदस्यों से बातचीत की और वैश्विक मंच पर भारत की समुद्री विरासत को प्रदर्शित करने में आईएनएस सुदर्शिनी की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अभियान भारत और अमेरिका के बीच समुद्री सहयोग तथा जनसंपर्क को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

न्यूयॉर्क प्रवास के दौरान जहाज पर एक विशेष राजकीय रात्रिभोज का भी आयोजन किया गया। इसमें वरिष्ठ राजनयिकों, सैन्य अधिकारियों और अन्य गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया। इस अवसर का उपयोग भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ करने तथा समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए किया गया। सभी निर्धारित कार्यक्रमों और आधिकारिक गतिविधियों के सफल समापन के बाद आईएनएस सुदर्शिनी न्यूयॉर्क बंदरगाह से रवाना होकर बोस्टन के लिए प्रस्थान कर गई है। वहां वह आगामी सेल बोस्टन 2026 समारोहों में भाग लेगी।

लोकायन 2026 अभियान के माध्यम से आईएनएस सुदर्शिनी विश्व के विभिन्न देशों तक भारतीय नौसेना का मित्रता, सद्भावना, समुद्री सहयोग और वैश्विक साझेदारी का संदेश पहुंचा रही है। भारतीय नौसेना का मानना है कि लोकायन 2026 केवल एक समुद्री यात्रा नहीं, बल्कि भारत की समुद्री पहचान, सांस्कृतिक विरासत और वैश्विक पहुंच को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण अभियान है। न्यूयॉर्क में आईएनएस सुदर्शिनी की सफल उपस्थिति ने एक बार फिर यह साबित किया है कि भारत अपनी प्राचीन समुद्री परंपराओं को आधुनिक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ प्रभावी ढंग से जोड़ रहा है।

Raj Sharma | July 9, 2026 | International | Google News


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